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रजत पालकी में निकले महाकाल: सीएम मोहन यादव ने किया पूजन, डमरू-मंजीरा बजाकर हुए भक्तिरस में लीन; हेलिकॉप्टर और 10 ड्रोन से राजसी सवारी पर हुई पुष्पवर्षा, बारिश में भी उमड़ा आस्था का सैलाब!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में श्रावण-भाद्रपद माह की परंपरा के तहत सोमवार को बाबा महाकाल की छठी राजसी सवारी कड़ाबीन के उद्घोष के साथ निकली। रजत पालकी में विराजमान भगवान महाकाल जब प्रजा का हाल जानने निकले, तो शहर का माहौल पूरी तरह भक्ति और उल्लास में रंग गया।
7 किलोमीटर लंबे मार्ग पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ी। जैसे ही पालकी आगे बढ़ी, आकाश से पुष्पवर्षा शुरू हो गई। हेलिकॉप्टर और 10 ड्रोन से भगवान का स्वागत किया गया। रामघाट पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने विशेष पूजन किया और फिर सवारी मंदिर की ओर लौट गई।
सीएम ने किया पूजन, गार्ड ऑफ ऑनर भी मिला
राजसी सवारी से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाकाल मंदिर में विधिविधान से पूजन-अर्चन किया। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल ने बाबा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “बाबा महाकाल का प्रांगण आज सचमुच स्वर्गलोक जैसा लग रहा है।” सवारी के दौरान सीएम ने मंजीरा और डमरू बजाकर भक्तिरस में डूबे क्षण भी बिताए।
छठी सवारी में शामिल स्वरूप और रथ
महाकाल मंदिर समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि श्रावण-भाद्रपद में निकलने वाली श्रृंखलाबद्ध सवारियों में यह छठी सवारी थी। इसमें विभिन्न स्वरूपों के दर्शन हुए—
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रजत पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर
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हाथी पर श्री मनमहेश
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गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव
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नंदी रथ पर श्री उमा-महेश
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डोल रथ पर होल्कर स्टेट का मुखारविंद
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रथ पर सप्तधान मुखारविंद
70 भजन मंडलियां, साधु-संत, पुजारी, पुरोहित, पुलिस बैंड और कलाकारों ने सवारी को और भव्य बना दिया।
बारिश के बीच भक्तों का उत्साह
जैसे ही सवारी निकलने वाली थी, अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। लेकिन भक्तों का उत्साह जरा भी कम नहीं हुआ। भीगते हुए भी भक्त मंडलियां नाचते-गाते बाबा महाकाल की जयकार कर रही थीं। रामघाट पर कलाकारों की मंडलियों ने लोकनृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को और दिव्य बना दिया।
ढुलिया जनजातीय का गुदुम बाजा नृत्य, हरदा के भुवनेश्वर का डंडा नृत्य, और बालाघाट की बैगा जनजाति का करमा नृत्य श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने।
सुरक्षा और अनुशासन पर खास ध्यान
सवारी मार्ग पर सुरक्षा की तीन-स्तरीय व्यवस्था की गई। पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भीड़ में धक्का-मुक्की या सेल्फी लेने जैसी गतिविधियाँ पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी। मोबाइल डिटेक्शन टीमें भी तैनात थीं।
सवारी के साथ चलित रथ पर एलईडी स्क्रीन से लाइव प्रसारण किया गया। उज्जैन के फ्रीगंज, नानाखेड़ा, दत्त अखाड़ा सहित कई इलाकों में भी श्रद्धालु इस प्रसारण के माध्यम से बाबा के दर्शन कर सके।